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आज़ादी चाहिए थी, और उसे सिर्फ 'वो'।
"मेरे बाप का कर्ज़ चुकाने की कीमत इतनी बड़ी होगी, मैंने सपने में भी नहीं सोचा था। वीराज कपूर... एक ऐसा मर्द जिसके लिए मोहब्बत एक सौदा है और जिस्म एक जागीर।
उसने मुझे खरीदा नहीं है, उसने मेरी रूह को कैद कर लिया है। उसकी छुअन में आग है और उसकी आँखों में एक ऐसा अँधेरा जो मुझे निगल जाना चाहता है। मैं उससे नफरत करना चाहती हूँ, पर जब उसका हाथ मेरी कमर पर कसता है, मेरा वजूद गद्दारी कर देता है।
क्या यह सौदा मेरी बर्बादी है, या एक ऐसी लत जिससे मैं अब छूटना ही नहीं चाहती?"
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