ऑफिस से घर तक का रास्ता जैसे रूहानी के लिए किसी सूली पर चढ़ने जैसा था। विराज की काली लिमोज़ीन के अंदर का सन्नाटा चीख रहा था।
विराज ने एक शब्द नहीं कहा, लेकिन उसकी उंगलियाँ रूहानी की नग्न जांघों पर किसी मालिक की तरह रेंग रही थीं, जो उसे बार-बार याद दिला रही थीं कि केबिन में जो शुरू हुआ था, वह अभी खत्म नहीं हुआ है।

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